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My first book review, ‘Solan- Ateet ke aaine mein’ || And a note to my neighbors

इतिहास- “लिख दिया जाए तो बार-बार पढ़ा जा सकता है और ना लिखा गया तो अनिश्चितता के सागर में खो जाता है”
इस पंक्ति के तर्क से इस Simple and Sober बुक की शुरुआत होती हैसोलन – अतीत के आईने में ‘, जो लिखी है के आर कश्यप ‘करुंण’ जी ने

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बचपन से पढ़ता आ रहा हूँ कि दुनिया घूमने से पहले अपने स्थान को जान लो, कभी इस saying की रीढ़ नही पढ़ पाया, पर जब ये पुस्तक पढ़ी तो समझ के नये आयाम बने।

आशा करता हूँ कि ये पुस्तक अपने क्षेत्र, प्रदेश और फिर देश-दुनिया को जानने की एक अच्छी आधारशिला बनेगी।

मैं इतना बड़ा तो नहीं बना कि इस पुस्तक का review करूँ पर अपनी observation इस किताब के कुछ बेहद interesting facts को अपनी पीढ़ी के Dazed ‘n’ confused generation के सामने ज़रूर रखना चाहूँगा। इससे पहले कि नस्ल की समझ globalization में गुम हो जाएँ, इस ज्ञान को सॅंजो लिया जाए।

The Sleeping Hills by Ashish Sharma on 500px.com

Shivalik hills in Solan

मैं लेखक को बधाई देना चाहता हूँ जिनकी वजह से हम ऐसे सैंकड़ों facts को जान पाए जो समय के साथ गुम हो जाएँगे, किसी भी misinterpretation या त्रुटि के लिया क्षमा चाहूँगा।
Blog की भाषा ‘हिंगलिश’ रहेगी क्युन्कि शुद्ध हिन्दी unfortunately हमारी पीढ़ी के गले में हड्डी है।

 

 

The Cloud in making by Ashish Sharma on 500px.com

Saproon Ghati


मेरे लिए ये पुस्तक पढ़ना और फिर ये ब्लॉग लिखना बहुत ही interesting phase रहा क्युन्कि मैं मिट्टी से मानस, सोलन के विभिन्न क्षेत्रों(Mashiwar, साधुपुल, पट्टा- महलोग और सोलन) में पल-बढ़ के ही बना हूँ।

मैने इस पुस्तक की Factology को कुछ हिस्सों में divide किया है, आशा करता हूँ इसे पढ़ के आप भी अपनी 2-3 स्थानीय पुस्तकों को गटक जाएँगे।

 

What makes this Tree significant is Sun by Ashish Sharma on 500px.com

A view from ‘Jaunaji’ road

Genesis:

  • बघाट(सोलन और आस पास की ठकुराइयों वाला क्षेत्र) के राजाओं के पूर्वज ‘सुरयावंशी राजा भोज’ कहे जाते हैं।
  • यहाँ के राणा शिवालिक हिमालय में settle हुए थे।
  • बघाट की राजधानी पहले जौणाजी थी।
  • कनेत जाती के लोग मावी वंश से ताल्लुक़ रखते हैं जो की मैदानी इलाक़ों के जाट थे।
  • इस क्षेत्र के अत्री राजपूतों का मारवाड connection है।

 

 

The two faces of Forest by Ashish Sharma on 500px.com

Changing landscapes view from ‘Kali ka tibba’

The People:

  • राजा दुर्गा सिंह:
    अगर आप सोलन के निवासी हैं तो आप को राजा दुर्गा सिंह को धन्यवाद करना चाहिए क्युन्कि उन्होने सोलन के विकास के इतने पत्थर रखे हैं कि कभी-कभी लगता है की उनके बाद विकास की प्रगति थम सी गई है, वे बघाट के अंतिम राणा एवं राजा भोज के वंश के 77वें राणा थे जिन्हें बाद में अँग्रेज़ों ने ‘राजा’ का पद दिया था।
    राजा दुर्गा सिंह ने लगभग एक दर्जन भवनों का निर्माण किया जिनमें से प्रमुख हैं नर्सिंघ मंदिर, दुर्गा मंदिर, शूलिनी मंदिर और दिलीपेश्वर मंदिर, एक मस्जिद और कुछ अस्पताल भी हैं।
  • Dr. Y S Parmar was a very distinguished leader. He used to drink tea at ‘Premjees’ hotel whenever he used to visit his home place in Sirmaur. वो प्रदेश की जनता के बीच में बहुत ही साधारण व्यवहार रखते थे। उनकी समस्यायों से अवगत होने के साथ-साथ अक्सर उनके घर जाकर उन्हें अश्कली, पट्टांडे और लुश्क़े बना के खिलाने के लिए कहते थे।
    Also, he had this very visionary dream of making one mountain state encompassing Gadhwal in UP of that time to the ‘hills of Punjab’ and ‘Jammu hills’.
  • हिमाचल प्रदेश के नाम का प्रस्ताव राजा दुर्गा सिंह ने ही दिया था।
  • कुनिहार रियासत के राणा थे अनंत देव, इनकी गाथा किसी Superhero की script से कम नहीं है। 82 वर्ष के थे जब वो अकेले ही दर्जनों सैनिकों से अकेले ही लोहा लेते वीरगति को प्राप्त हो गये थे, उनके शरीर पर 22 निशान थे।
  • साधुपुल के भल्कू नंबरदार का नाम तो अपने सुना ही होगा, जब अँग्रेज़ों ने बड़ोग की tunnel के निर्माण के वक़्त हाथ खड़े कर दिए थे तो वही थे जिन्होने प्रस्ताव रखा था कि वो इस काम को पूरा कर सकते हैं।
  • Kuthaad ठकुराई के निर्माण की रोचक कहानी जो वहाँ के साहसी लोगों का बयान देती है।
  • जहाँ हिमाचल में हमने बचपन से यहाँ के निवासियों से अँग्रेज़ों की कहानी सुनी है या यहाँ के शासनकरताओं से उनके संबंध सुने हैं, वहीं कुछ ऐसे सूरमे थे जो आज़ादी की चिंगारी जलाने के प्रय्तनकर रहे थे। पंचम चन्द कटोच, वंशी राम, शेर जंग, राजेन्द्र दत्त, बाबू कांशी राम, पंडित पदम देव, यशपाल, मंगत राम, जे पी बागी, अमृत कौर, सरला शर्मा और देववती हिमाचल के कुछ प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • राम प्रसाद बैरागी जी 1857 क्रांति के हिमाचली पंडित थे।

 

 

The Jatoli temple by Ashish Sharma on 500px.com

Jatoli temple

Interesting Places:

  • कालू दादा का मंदिर, जाबली कोटी
  • तांडव गुफा शिव मंदिर, अर्की
  • जुंगा देवी मंदिर – It has a cave which leads to Ashwani khadd.
  • Hindur का महल जो की बाकी सब महलों से सबसे अच्छी अवस्था में है।
  • Chail palace has American, Holland, Kashmiri and Canadian trees in their compound.
  • डग्शाई का भी एक बहुत रोचक तथ्य है। इसके उत्तर में गंभर नदी बहती है जो सतलुज में मिलती है। सतलुज नदी अंततः अरब सागर में जाकर मिलती है। इसके पूरब में कवाल खड्ड है जो गंगा में मिलती है। गंगा नदी ultimately sea of Bengal में मिलती है। दक्षिण में कोषल्या खड्ड बहती है जो सिरसा नदी में मिलती है जो ultimately Indian ocean में मिलती है।

Quotes ‘n’ Sayings:

  • जिसने पीया पानी बघाट का, वो घर का रहा ना घाट का
  • बघाट के दो मतलब हैं, एक तो प्रचलित बारह घाट और दूसरा ‘बाओ घाट’ मतलब कई घाट।
  • Deothi का दूसरा नाम द्‍यारश घाट है।
  • “लोटा लूण” एक पहाड़ी सत्याग्रह था।
  • भाई दो ना पाई दो, a popular saying from Pandit Padam Dev’s freedom campaign in Himachal region।

Interesting facts:

  • Famous Karol peak is 7393 feet high.
  • Due to very sparsely populated rural areas and limited defense rulers often used to warmly host the ‘Desi’ attackers and negotiate with them.
  • People used to hide their valuable items in small caves.
  • ‘धाम’- पुत्र के विवाह के अवसर पर पिता को 10 रुपये की धनरशि का व्यय करना होता था।
  • बघाट के बृजेश्वर देव Kuthad में बीजू देव कहे जाते हैं।
  • Around 400 soldiers from Sirmaur fought in 2nd world war.
  • महासु जिला की राजधानी कूसमपटी हुआ करती थी क्युन्कि शिमला पंजाब हिल्स में आता था।
  • दून और सप्रून सोलन शहर की दो घाटियाँ हैं।
  • थोडा खेल महाभारत युद्ध की स्मृति में खेला जाता है।
  • ‘करियाला’ समाज सुधार के लिए की गई हास्य नाटिकाएँ हैं।
  • धारों की धार किले से बनसार किले तक मशाल से संदेश भेजे जाते थे।
  • आज़ादी के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर से सोलन shift हुई थी जो बाद मैं चंडीगड़ निर्माण के समय स्नानत्तरण हो गई।

 

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